Wednesday, February 17, 2010

माइ नेम इज खान

एक फिल्म कितना हंगामा खड़ा कर सकती है इसका इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता । एक साधारण सी फिल्म को असाधारण बनाने में जैसे सारी कायनात एकजुट हो गयी हो । पहले शिवसेना वालों ने मुफ्त की पब्लिसिटी दे डाली बाकी रही सही खबर मीडिया वालों ने पूरी कर दी । शायद हमारे देश में नेताओं और पत्रकारों के पास मुद्दों की कमी हो गयी है। हिन्दी में इससे बहुत अच्छी फिल्में बनी हैं जिन्हें अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
आतंकवाद एक अन्तर्राष्ट्रीय समस्या है जिसके समाधान की कोशिश की जानी चाहिये और हर ऐसे कोशिश की सराहना की जानी चाहिये।